Tuesday, June 2, 2020

OMG! जून में बढ़ेगा टिड्डियों का कहर, 10 दिन बाद देने वाली हैं करोड़ों अंडे Jaipur News in Hindi


जयपुर. देश भर में जहां एक तरफ कोरोना वायरस का कहर छाया हुआ है वहीं दूसरी तरफ टिड्डियों का दल किसानों के लिए आफ़त बनकर सामने आया है. एक दिन में डेढ़ सौ किलोमीटर तक उड़ने वाले टिड्डी दलों (Locust Swarm) को अगर रोका न जाए तो ये देश के लिए खाद्य सुरक्षा (Food Security) का खतरा पैदा कर सकते हैं. लेकिन यह पहली बार है कि टिड्डियों के दल शहरी इलाकों (Urban Areas) में देखे गए. हाल ही जयपुर शहर में इन दलों ने घरों में घुसकर लोगों को हैरान परेशान कर दिया. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी शहरी क्षेत्रों में झुंड के झुंड देखे गए. ऐसे में जानकारों का कहना है कि आने वाला समय टिड्डियों के मुताबिक होने वाला है जिसके चलते टिड्डियों से होने वाली दिक्कत अभी और बढ़ने वाली है. जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना था कि टिड्डियां जल्द ही अण्डे देने की स्थिति में आ जाएंगी और जयपुर में चैमूं, जोबनेर, विराटनगर, जयपुर में सेण्डी सॉयल के स्थानों पर नजर रखनी होगी. अगर ऐसा हुआ तो इन अंडों से निकला निम्फ (फाका) खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है. टिड्डियों का रंग बदलने से उनके मेच्योर होने का पता चल जाएगा.

हाल ही में हुई एक बैठक के में एन्टोमोलॉजी विषेशज्ञों का कहना है कि टिड्डियों का हमला जून में और बढ़ सकता है. जिला कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में विषय विषेषज्ञों ने बताया कि कार्ययोजना की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जयपुर में मई के दूसरे सप्ताह में करीब 26 साल बाद हुआ टिड्डियों का हमला अभी जारी है और जून में और भी भीषण हमले हो सकते हैं. इससे बचाव के लिए कई स्तर पर तैयारी की जरूरत है जिसमें जयपुर के पड़ोसी जिलों के साथ ही सीमावर्ती जिलों के साथ भी समन्वित योजना की जरूरत होगी. उन्होंने बताया कि टिड्डियों के अण्डे देने की स्थिति में आने में 10-15 दिन ही बचे हैं, इसलिए जिले में सेण्डी सॉयल वाले स्थानों पर विशेष नजर भी रखनी होगी.

उन्होंने कहा कि टिड्डियों के खात्मे के लिए उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों के भी अपने नुकसान हैं, इसे देखते हुए दवा की निर्धारित मात्रा का ही उपयोग किया जाना चाहिए. जिला कलेक्टर डॉ जोगाराम टिड्डियों के प्रकोप से निपटने की रणनीति बना रहे हैं. जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय जिला प्रशासन को तकनीकी सहयोग देगा.

बैठक में उप निदेषक कृषि विस्तार, जिला परिषद बी.आर.कड़वा ने जिले में टिड्डियों के अब तक हुए हमलों के पेटर्न एवं उनके नियंत्रण के प्रयासों की जानकारी दी. प्रोफेसर एवं हेड, कीट विज्ञान आरएआरआई, दुर्गापुरा, डॉ. ए.एस.बलोदा का कहना था कि टिड्डियों से निपटने के लिए दवाओं के उपयोग के अलावा कोई विकल्प अभी नहीं है, लेकिन दवाओं की मात्रा विशेषज्ञों के निर्देषन में ही डाली जानी चाहिए. विशेषज्ञों का मानना था कि जिस जगह टिड्डी स्वार्म के खात्मे के लिए कीटनाशक छिड़के जाएं वहां कम से कम 10 दिन पशुओं को नहीं चराना चाहिए. अन्यथा यह कीटनाशक भोजन शृंखला में शामिल हो सकते हैं.थोड़ा जल्दी आ गया है टिड्डी दल
टिड्डी प्रजनन का मौसम जून-जुलाई से अक्टूबर-नवंबर तक होता है. लेकिन इस बार यह मई में ही आ गया है. टिड्डियों का दल आमतौर पर हवा की दिशा में उड़ता है. पाकिस्तान से होकर भारत के रेतीले क्षेत्रों में प्रवेश कर जाता है.